Sunday, August 23, 2026

811 ..धागे कच्चे हैं मगर, लेकिन पक्की प्रीत।

रक्षा बंधन पर अशेष शुभकामनाएं



राखी कह या श्रावणी, पावन यह  त्यौहार  
कच्चे धागों से बंधा ,भाई बहन का प्यार।।

थाली लेकर शगुन की,बहन सजाये भोर।
रोली से टीका किया, बाँधी रेशम डोर।।

रेशम की ये डोरियाँ , कच्चे धागे चार।
सच्चा रिश्ता प्रीत का, निश्छल पावन प्यार।।

धागे कच्चे हैं मगर, लेकिन पक्की प्रीत।
बहना से भाई कहे, हम बचपन के मीत।।

राखी का त्यौहार यह, बाँटे केवल नेह।

बेटी चल ससुराल से , आई बाबुल गेह।।
देते जो कुर्बानियां , होते हैं जाँबाज।

बाँधो उनको राखियाँ ,रखते हैं जो लाज।।
एक वचन मैं माँगती, भैया तुमसे आज।

रक्षा कर माँ बाप की, रखना कुल की लाज।।
देती हूँ भैया वचन, मैं भी तुमको आज।

सास ससुर माँ बाप सम, समझ करूँगी
कच्चे धागों से बंधा ,भाई बहन का प्यार।। 

हरियाली चहुं ओर है, धरा किया श्रृंगार
रहे मुबारक आपको ये राखी का त्यौहार

-रचनाकार अज्ञात

3 comments:

  1. त्योहार विशेष पर सुंदर रचना।
    सादर।
    ------
    जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना शुक्रवार २८ अगस्त २०२६ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    सादर
    धन्यवाद।

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  2. रक्षाबंधन की मंगलकामनाएं |

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  3. सुंदर सृजन, रक्षा बंधन की शुभकामनाएँ

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