-दिग्विजय
Friday, August 28, 2026
813 ...ये अवसाद भी न क्या कुत्ती चीज है
-दिग्विजय
Sunday, August 23, 2026
811 ..धागे कच्चे हैं मगर, लेकिन पक्की प्रीत।
राखी कह या श्रावणी, पावन यह
त्यौहार
कच्चे धागों से बंधा ,भाई बहन का प्यार।।
थाली लेकर शगुन की,बहन सजाये भोर।
रोली से टीका किया, बाँधी रेशम डोर।।
रेशम की ये डोरियाँ , कच्चे धागे चार।
सच्चा रिश्ता प्रीत का, निश्छल पावन प्यार।।
धागे कच्चे हैं मगर, लेकिन पक्की प्रीत।
बहना से भाई कहे, हम बचपन के मीत।।
राखी का त्यौहार यह, बाँटे केवल नेह।
बेटी चल ससुराल से , आई बाबुल गेह।।
देते जो कुर्बानियां , होते हैं जाँबाज।
बाँधो उनको राखियाँ ,रखते हैं जो लाज।।
एक वचन मैं माँगती, भैया तुमसे आज।
रक्षा कर माँ बाप की, रखना कुल की लाज।।
देती हूँ भैया वचन, मैं भी तुमको आज।
सास ससुर माँ बाप सम, समझ करूँगी
कच्चे धागों से बंधा ,भाई बहन का प्यार।।
हरियाली चहुं ओर है, धरा किया श्रृंगार
रहे मुबारक आपको ये राखी का त्यौहार
-रचनाकार अज्ञात
Saturday, August 22, 2026
809 .. उसने पूछा - मैं क्या हूँ तुम्हारी ?
मातृभाषा -
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Wednesday, August 19, 2026
810 निर्माण सीखने की बजाय दरारों की समझ नें रुचि लेने वाली बेटी
दरार ..... महेन्द्र मद्धेशिया
Thursday, August 13, 2026
साहस व सपनों का साथ
* विश्वास *
दोनों ट्रेन की प्रतीक्षा कर रही थी
मां की साहस भरी सीख प्रज्ञा के मन में विश्वास बन कर उतर चुकी थी
Wednesday, August 12, 2026
807 ...किशोरी ने बिना कुछ कहे इंसानियत कि सलीका सिखा दिया
सलीका
एक वृद्ध महिला शेड के नीचे बारिश से बचने की कोशिश कर रही थी
और ठंड से कांप भी रही थी, चौकीदार उसे हटने को कह रहा था,
दिया अपना छाता और काफी का कप लेकर बाहर पहुंची
और मुस्कुराते हुए कहा अम्मा ये छाता रख लीजिये,
और थोड़ा काफी पी लीजिए.
वृद्धा की नम आंखें और चौकीदार की झुकी नजरे बता रही थी कि
उस किशोरी ने बिना कुछ कहे इंसानियत कि सलीका सिखा दिया
बिना कुछ कहे इंसानियत कि सलीका सिखा दिया
-ऋतु मिश्रा
