Thursday, October 7, 2021

783 ..आज माताश्री के पहले दर्शन शैलपुत्री के रुप में


सादर अभिवादन
नवरात्रि हिंदुओं का एक प्रमुख पर्व है। नवरात्रि शब्द एक संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ होता है 'नौ रातें'। इन नौ रातों और दस दिनों के दौरान, शक्ति / देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है। दसवाँ दिन दशहरा के नाम से प्रसिद्ध है।
आज माताश्री के पहले दर्शन शैलपुत्री के रुप में


आज की रचनाएँ..



देवी दुर्गा जय महेश्वरी
राजेश्वरी, मात जगदम्बा,  
आश्विन शुक्ल नवरात्रि शारद
अद्भुत उत्सव कालरात्रि का !

देवी का आगमन  सुशोभन
उतना ही है भव्य प्रतिगमन,
जगह-जगह पंडाल सजे हैं
करते बाल, युवा सब नर्तन !




हर कोई यही चाहता है कि जब तक जिंदगी है वह स्वावलंबी बना रहे ! पटाक्षेप होने तक चलायमान स्थिति में रह सके ! सच भी है, जब तक इंसान क्रियाशील रहता है उसका शरीर भी साथ देता रहता है ! उम्र को सिर्फ एक अंक मानने वाले ज्यादा देर तक गतिशील बने रहते हैं ! पर इसके बावजूद इंसान अब इंसान ना रह कर मशीन बना दिया गया है ! जब तक काम करती है, बढ़िया ! अन्यथा उठा कर "स्क्रैप" में फेंक दो ! देश में यूँही नहीं सैंकड़ों की तादाद में वृद्धाश्रम खुलते जा रहे हैं ! वह भी वहां, जहां बचपन से ही माँ-बाप को भगवान का दर्जा देने की सीख दी जाती है ! वहां इन तनहा इंसानों को डोलते देख रूह कांप जाती है !!



कंजूस प्रेमी नहीं होता..हो नहीं सकता।
नहीं तो वह कंजूस नहीं हो सकता।
ये दोनों बातें एक साथ नहीं घट सकतीं;
ये विपरीत हैं। जितना तुम धन को इकट्ठा करते हो
उतना ही तुम्हारा प्रेम पर भरोसा कम है।
तुम कहते होः कल क्या होगा? बुढ़ापे में क्या होगा



मेरा प्रेम
था अलिंद के बाएं कोने पर
ऐसा रिक्त स्थान
जहाँ हमने सहेजी
सिर्फ व सिर्फ तुम्हारी मुस्कान
परत दर परत
चिहुंकती चौंकती खिलखिलाती
तो कभी मौन स्मित मुस्कान

सादर


Wednesday, October 6, 2021

782..ये अंक अवकाश की सूचना है

सादर अभिवादन
आज से अवकाश अंक शुरु
आपसे निवेदन
अंक नहीं पढ़ना हो तो न पढ़ें  
टिप्पणी नहीं देना हो तो न दें
ये अंक अवकाश की सूचना है
1000 अंक होते ही..ब्लॉग तो रहेगा पर
कोई नया अंक नही आएगा
अब तक आपने साथ दिया
आभार आप सभी को
सादर

आज के अंक मे महालया
पितृ पक्ष  की आखिरी श्राद्ध तिथि  को महालया पर्व  मनाया जाता है। यानी महालया के साथ ही श्राद्ध खत्म हो जाते हैं। वहीं महालया के साथ ही दुर्गा पूजा  के उत्सव की शुरुआत हो जाता है देखिय़े, सुनिए



सादर

Tuesday, October 5, 2021

781 ..हमारे रास्ते सारे स्वतः ही मिलतें जाएंगे

सादर अभिवादन
कल की प्रस्तुति में कोई टिप्पणी नहीं
से भी हो सकता है है..किसी ने सूचना न देखी हो
या , ये भी हो सकता है कि मैं सूचना देना भूल गई हूँ
चलो कोई बात नहीं, हमारे संग्रह में वृद्धि हुई

आज की रचनाएँ ..



तन्हाइयों में क़ैद था आँसू भी जल में था
ग़म भी तमाम रंग में खिलते कमल में था

महफ़िल में सबके दिल को कोई शेर छू गया
शायर का इश्क,ग़म का फ़साना ग़ज़ल में था




जब मैं बूढ़ा हो जाउंगा तब तुम भी मेरा हाथ पकड़ कर सड़क पार करना। आपकी यह शिक्षा मुझे बहुत अच्छी लगी।सचमुच आज वही स्थिति हो गयी। मेरे कार्यालय से आने का और आपके सब्जी लाने का समय एक ही है।जब मैं आपको सड़क पार करने में असमर्थ पाता हूं



बादलों से घिरी
अंधियारती शाम
या फिर
किसी की याद,
किसी का छोड़ जाना,
किसी मित्र का
हो जाना अजनबी




मुझे याद है
आज भी
तुम्हारी आंखों में
उम्र के सूखेपन के बीच
कोई स्वप्न पल रहा है
कोई
श्वेत स्वप्न।
तुम जानती हो
कोरों में नमक के बीच




खिजाएँ लौट जाएंगी सजन जब मुस्कुराएंगे ।
बहारें संग आयेंगी, भँवर भी गुनगुनाएंगे ।।

नहीं कोई भी गम होगा सजन जब साथ में होगा
हमारी रास्ते सारे स्वतः ही मिलतें जाएंगे ।

सादर 

Monday, October 4, 2021

780..कल प्रकृति दिवस था , कोई बात नहीं प्रकृति दिवस तो रोज मना सकते है

 सादर अभिवादन
कल प्रकृति दिवस था , कोई बात नहीं
प्रकृति दिवस तो रोज मना सकते है
ये नई कि आज एक पौधा लगाए और 
उसकी याद अगले प्रकृति दिस मे आए

आज की रचनाएं...




आज विश्व प्रकृति दिवस है,
प्रकृति है तो हम हैं ,
प्रकृति की गोद में ही हम
फलते फूलते हैं जीते हैं खेलते हैं सीखते हैं
विकास करते हैं इस लिए
अपनी मां जननी सरीखी इस
प्रकृति के लिए सदा हम कुछ करते रहें 




जिंदगी नही, जिंदगी का भरम, जी रहा आज का आदमी
जिंदगी की ख्वाइश में जिंदगी, खो रहा आज का आदमी

सुबह सबेरे उठके तडके, करने लगता जुगाड दो रोटी का
खुशी की तलाश में, खुद से दूर हो रहा आज का आदमी





दही मथें माखन मिले,  केसर संग मिलाय,  
होठों पर लेपित करें,  रंग गुलाबी आय..

बहती यदि जो नाक हो,  बहुत बुरा हो हाल,  
यूकेलिप्टिस तेल लें, सूंघें डाल रुमाल..

अजवाइन को पीसिये, गाढ़ा लेप लगाय,
चर्म रोग सब दूर हो, तन कंचन बन जाय..

अजवाइन को पीस लें, नीबू संग मिलाय,
फोड़ा-फुंसी दूर हों, सभी बला टल जाय..

अजवाइन-गुड़ खाइए, तभी बने कुछ काम,
पित्त रोग में लाभ हो, पायेंगे आराम..





वही शहर है वही रास्ते वही घर है और वही लॉन भी
मगर इस दरीचे से पूछना वो दरख़्त अनार का क्या हुआ

मिरे साथ जुगनू है हम-सफ़र मगर इस शरर की बिसात क्या
ये चराग़ कोई चराग़ है न जला हुआ न बुझा हुआ  



मुझे ऑनलाइन देख तुम खुश होती हो
स्टेटस पे मुझे तुम जोहती हो
जो जोड़े हमें 'नेट' वो डोर है
तेरे अंदर बैठा एक चोर हैं
यह सब उसी चोर का खेल है
कहीं सच उजागर न हो जाए
उसी डर से खिली यह बेल है

सादर

Sunday, October 3, 2021

779 ...कितनी गांठें, बंध गई, इस मन के अन्दर

सादर अभिवादन
श्राद्ध पर्व अब रवानगी की ओर है
अब कौवों के दिन भी लदने वाले हैं
फिर घूरे-मुक्कड़ो में मन रमाना होगा
बच्चों से पत्थर खाना होगा
रचनाओं की ओर चलें


तुम्हारी लिखी जिन चिट्ठियों को मैं
अब तक हृदय से लगा कर संजोती आई थी
उनकी राख और चुन चुन कर तुम्हारे दिए
सभी स्मृति चिन्ह और उपहारों के फूल
एक पोटली में बाँध विसर्जित कर आई हूँ




कितनी गांठें, बंध गई, इस मन के अन्दर,
प्यासा रह गया, कितना समुन्दर,
बहता जल, नदी का, ज्यूं कहीं हो ठहरा,
लगाए, खुद पे पहरा,
हर शै, यहां कितना अधूरा!




मीलों लम्बी
घिरी उदासी
देह ज़रा-सी।

कुर्सी, मेजें,
घर, दीवारें
सब कुछ तो मृतप्राय लगें





वर्ष भर तो याद न किया
कागा अब क्यों याद आया
पहले जब भी मुडेर पर बैठते
बच्चे तक तुम्हें उड़ा देते थे
पर अब बहुत आदर सत्कार से
बुलाकर सत्कार  किया जाता तुम्हारा




तुमसे मिले हुए
कई दिन हो गए हैं
पर लगता है जैसे
कल ही की बात है
होंठों पे स्वाद है
साँसों में ख़ुशबू है
हाथों को अहसास है

सादर 

Saturday, October 2, 2021

778 ...छोटा कद पर सोच बड़ी थी तेज सूर्य का चमके भाल।

 सादर अभिवादन

आज गांधी जी और शास्त्री जी का जन्मदिवस है
दोनो ही अपने समय के महान विभूति थे...
आज का विशेष अंक आपके सन्मुख...



17 जून 2007 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में एक प्रस्ताव पारित कर दुनिया से आग्रह किया गया था कि गाँधीजी को जन्म दिवस को  शांति और अहिंसा पर चलने का प्रण लेते हुए अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाएँ।
गांधी जी के तीन मुख्य सूत्र.....
1) कथनी और करनी में कोई अंतर न होना
गाँधीजी मितव्ययता पर ज़ोर देते थे। वे स्वयं अल्प वस्तुओं के साथ जीवन निर्वाह करते थे। गाँधीजी का यह गुण आज भी उतना ही प्रासंगिक है।

2) व्यवहारिक नज़रिया या दृष्टिकोण ....
उन्हें बौद्ध धर्म और जैन धर्म की अहिंसा की बातों ने बेहद प्रभावित किया। जैन धर्म के मानने वालों का नजरिया अंहिसा के मामले में थोड़ा कट्टर है। वे नाममात्र की हिंसा में भी विश्वास नहीं रखते। वहीं बौद्ध धर्म का नज़रिया  अहिंसा को लेकर लचीला है। 
गाँधीजी ने दोनों के बीच का मार्ग चुना।

3) हर किसी के साथ  संवाद स्थापित करने की कला
अपनी संवाद कला को जरूरत के हिसाब से बदलकर गाँधीजी ऐसा करने में सक्षम होते थे। गाँधी को गाँधीजी बनाने में उनके  संवाद कौशल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।




छोटा कद पर सोच बड़ी थी
तेज सूर्य का चमके भाल।
भारत माँ के गौरव थे वो
कहलाये गुदड़ी के लाल।।

कुर्ता धोती गाँधी टोपी
यही रही उनकी पहचान।
सादा जीवन सदा बिताए
कौन यहाँ उनसे अनजान।।




हाय गजब कैसी करी ये दुश्मन नें चाल।
ताशकन्द में उठ गया भारत माँ कौ लाल॥
भारत माँ कौ लाल वात मित्रन ने कीनी।
घर में लियौ बुलाय, धौंस बहुतेरी दीना॥
जबरन सन्धि कराया कै, दस्तखत लिये कराय।
हाय हमारौ शास्त्री, मुख न दिखायौ आय॥





एक अनंत विश्वास
छा  जाता है जब
जो सदा से वहीं था
सचेत हो जाता है मन उसके प्रति
तो चुप लगा लेता है स्वतः ही
वह अखंड मौन ही समेटे हुए है अनादि काल से
हर ध्वनि हर शब्द को
सारे सवाल और हर जवाब भी वहीं है




ग़ज़ल को गाना मिरे बस की बात कब है मियां
ये कारोबार तो मीरासियो के होते है

"तुफ़ैल' आयेंगे इतने कहाँ से राजकुमार
कि ऐसे ख्वाब सभी लड़कियों के होते है




अंधकार के राज्य में, दीये का संघर्ष,
त्रास हारता है सदा, विजयी होता हर्ष ।

कहीं खेल विध्वंस का, कहीं सृजन के गीत,
यही सृष्टि का नियम है, यही जगत की रीत ।




भर ही जाएं, ना कुरेदो ज़ख़्म कोई,
रहने दो, यूं ही पड़ा,
सह लूंगा, राह की ठोकरें!

टूटे पत्थरों के गीत, कोई क्यूं सुने‌....




है तुम्हारे हवाले वतन साथियों
कर गया कोई हमें नामजद साथियों
सांस् अटकी यहां प्रेम से साथियों
कर हवाले तुम्हारे  वतन साथियों
वक़्त मुश्किल कटा हाथ सबका छूटा
हो गए अजनबी हम तो अब साथियों


आज बस
सादर

Friday, October 1, 2021

777 ...सुनता कोई भी नहीं था पर सब बोले जा रहे थे

सादर अभिवादन
आज विश्व बुजुर्ग दिवस है


प्रत्येक साल 1 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय वृद्ध दिवस के रूप में मनाया जाता है. 
विश्व में वृद्धों एवं प्रौढ़ों के साथ होने वाले अन्याय, उपेक्षा और दुर्व्यवहार पर 
लगाम लगाने के उद्देश्य से हर साल इंटरनेशनल डे ऑफ ओल्डर पर्सन 
(International Day Of Older Persons) मनाया जाता है.

प्रस्तुत है रचनाएँ....

विश्व बुजुर्ग दिवस .....डॉ. टी.एस.दराल


पार्क में एक पेड़ तले दस बुज़ुर्ग बैठे बतिया रहे थे,
सुनता कोई भी नहीं था पर सब बोले जा रहे थे !
भई उम्र भर तो सुनते रहे बीवी और बॉस की बातें,
दिन मे चुप्पी और नींद मे बड़बड़ाकर कटती रही रातें !
अब सेवानिवृत होने पर मिला था बॉस से छुटकारा,
बरसों से दिल मे दबा गुब्बार निकल रहा था सारा !



रात भर जागकर हरसिंगार वृक्ष
उसकी सख्त डालियों से लगे
नरम नाजुक पुष्पों की करता रखवाली

भूले गले लगाना ! ..डॉ. ज्योत्सना शर्मा


चंदा-सूरज
मुट्ठी में बाँध लिए
सागर सारे
पर्वत नाप लिए
अँधियारों पे
विजय पा गए  हो
उजालों में क्यूँ
यूँ भरमा गए हो ?


अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर ...गिरीश पंकज


जिसने इस दुनिया में आकर,
गर वृद्धों का सम्मान किया ।
उसने अपने लघु जीवन का,
प्रतिफल जैसे उत्थान किया।
उसका वंदन जो बूढ़ों का,
बढ़कर अभिनंदन करता है ।
जो वृद्धजनों की सेवा में,
तन-मन- धन अर्पण करता है।।


आज नया इक गीत लिखूँ ......कुसुम कोठारी


वीणा का जो तार न झनके
सरगम की धुन पंचम गाएँ
मन का कोई साज न खनके
नया मधुर सा राग सजाएँ
कुछ खग के कलरव मीठे से
पीहू का संगीत लिखूँ मैं।।
...
आज बस
कल आऊँगी गांधी जी के साथ
सादर