Wednesday, October 28, 2026

821 ...विशुद्ध इंसान कब बना, मालूम नहीं

 देहदान  ..सुबोध कुमार सिन्हा


तमाम उम्र ता उम्र, मैं हैरान, परेशान, हलकान सा,
तो कभी लहूलुहान बना रहा

हो मानो जैसे,मुसलमानों के हाथ में गीता
कभी हिन्दुओं के हाथ में कुरआन बना रहा

ज़िंदगी भर हममें से कोई हिंदू बना रहा
तो कोई सिक्ख या इसाई तो कोई मुसलमान बना रहा.

विशुद्ध इंसान कब बना, मालूम नहीं
मरा तो कोई श्मशान,तो कोई कब्रिस्तान चला गया

क्यों न मर कर,हम सभी महज़ इंसान बने और
करते रहें निज मृत देह का प्रबुद्ध देहदान सर्वदा

क्षमा करें
करें मृत देह का अंग-अंग साझा सर्वदा

लेखन दिनचर्या मे शामिल

3 comments:

  1.  आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में गुरुवार 29 अक्तूबर, 2026 को लिंक की जाएगी ....  http://halchalwith5links.blogspot.in  पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!

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  2. सादर नमन आदरणीय 🙏
    हमारी इस बतकही को इस संग्रहणीय ब्लॉग वाले मंच पर और पाँच लिंको के आनन्द पर भी साझा कर ए के लिए आपका हार्दिक आभार .. पुनः मन से नमन 🙏

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  3. मृत्यु के बाद यदि कोई अंग किसी के काम आ सके तो अच्छा ही है

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