Saturday, November 7, 2026

826 ...अकेला हुआ तो अकेला चला मैं

 अकेला ...नम्रता मिश्रा 'साहसी'


जो भी मिला, लेकर चला मैं,
अपनो ने छोड़ा, अकेला चला मैं.

आगे थी दुनिया, पीछे खड़ा मैं
सामने थे अपने, सबसे लड़ा मैं

कि तब था फरिश्ता, अब मै हूँ बला
जो भी था पास, लुटा कर चला मैं

जश्न में थी भीड़ पर दुख में अकेला मिला मै,
सारे गुणों-अवगुणों को ढोता चला मैें

अकेला हुआ तो  अकेला  चला मैं
तेज, बहुत तेज चलता चला मैं 

 अनकही-पेज 37

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