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Saturday, October 20, 2018

11....उम्र ढल चुकी अब तो, और दूर चला नहीं जाता

सादर अभिवादन
दशहरा तो हो गया कल
जल गया पुतला रावण का
जिन्होंनें कल जलाया उनके भीतर का
श्री राम जीवित था....पर आज...
जस का तस हो गया.....
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चलिए चले आज की संक्षिप्त प्रस्तुति की ओर....
विभा दीदी की कलम से...
"शुभोत्कर्षिणी"

सभी उलझन में ही थे कि लाल कमल से भरी टोकरी लेकर अलगू की बेटी चिकित्सक के सामने आ खड़ी हुई...
      "इसे लेकर मैं क्या करूँगी बेटी...? यह दुर्गा माँ के लिए होता है...।"
"जानती हूँ! आप इसमें से एक लाल कमल लेकर बोहनी समझिए डॉक्टर मैडम जी और बाबा का इलाज शुरू कीजिए... मैं मजदूरी नहीं कर सकती, व्यापार तो कर सकती हूँ...!"

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मीना भारद्वाज जी की कलम से...
"त्रिवेणी"....

आज कल बोलने का वक्त है । 
कहने सुनने से आत्मबल बढ़़ जाता है ।

मछली बाजारों में बातें कहां शोर ही सुनता है ।। 

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रविंद्र जी "रवी" पहला बार इस ब्लॉग में
ढलती उम्र.....

काफिले नजर नहीं आते ,
मंजिलें नजर नहीं आती
उम्र ढल चुकी अब तो,
और दूर चला नहीं जाता

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संजय भास्कर की एक अनेखी पेशकश.....
हिंदी सिनेमा की सदाबहार अदाकारा और 
खूबसूरती की मल्लिका - रेखा

बॉलीवुड का ऐसा नाम जो आज भी सब के जुबां पर रहता है वो है रेखा सदाबहार अभिनेत्री रेखा हिन्दी फिल्म जगत की शान हैं। उनके चेहरे की चमक आज भी अन्य अभिनेत्रियों की शान को फीका कर देती है। अपने हिस्से आए हर किरदार को दमदार बनाने वाली रेखा के आंचल में कई बड़े पुरस्कार आए। वो राजकीय पुरस्कार पद्मश्री से भी सम्मानित हैं। 

चलते-चलते अंकित चौधरी का एक गीत

ये जो चाँद है ! चाँद नहीं है , एक सागर है ,
नाव चलाओ तो सही उसपर,
मैं  लहरों  की रवानी दे  दूं |   
पहुंच जाओ बचपन  में , कि बचपन बहुत याद आता है ,
खेल खेलो कोई फिर से ,कि मैं तुम्हे दादी की कहानी दे  दूं । 

आज बस
फिर मिलते हैं
यशोदा