सादर अभिवादन
दिल्ली मे दंगा चालू आहे
अफवाहों का बाजार भी गर्म है
माननीय गूगल के एक न्यूज़ लेटर
में पढ़ी ये खबर...
कि पाकिस्तान नें
भारत का ध्यान पी.ओ.के से
हटाने के लिए सी.आई.ए के जरिए
शाहीनबाग में एक
जलता हुआ कोयला(चिंगारी) डाला
कहां तक सच है ये तो
ऊपरवाला जाने..
...
चलिए रचनाओं की ओर चलें

अज़ब जद्दोजहद में जी रहे हैं
फटे हैं जिस्म, झण्डे सी रहे हैं
हमारा कान कौव्वा ले गया है
हमारे दोस्त दुःख में जी रहे हैं
अचानक देशप्रेमी बढ़ गए हैं
कुएँ में भाँग है सब पी रहे हैं

क्यों दिखता नहीं
एक ज़िंदा भारतीय
क्यों दिखती नहीं
भूख से कुलबुलाती
उसकी अतड़ियाँ ..!
उसकी आशायें ,
उसकी हसरतें ,
दिखती कब हैं

प्रवक्ता हूँ, सियासत का।
दंगों में हताहत का हाल
सूरते 'हलाल' बकता हूँ,
खबरनवीसों में।
पहले पूछता हूँ,
थोड़ी खैर उनकी।
दाँत निपोरकर!
सुनाई देती है,

जलती बस्ती~
खड़ा है लावारिस
संतरा-ठेला।
शहरी दंगा~
एक सौ पचास है
दूध का भाव।

समुद्र तुम्हारे सामने है,
डरो नहीं, मंथन करो,
हो सकता है, विष मिले,
पर अंत में अमृत मिलेगा.
यह मत समझो, तुम अकेले हो,
हिम्मत करो, आगे बढ़ो,
तुम्हारी मदद के लिए
आ जाएगा कोई विष्णु कहीं से.
...अब बस
कल फिर
सादर...
...अब बस
कल फिर
सादर...