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Thursday, May 28, 2020

368 ...यक्ष प्रश्न: जीवन का उद्देश्य क्या है?

सादर नमस्कार
जीवन का उद्देश्य 
उसी चेतना को जानना है 
जो जन्म और मरण के 
बन्धन से मुक्त है।....और 
उसे ही जानना ही मोक्ष है।

अब चलिए रचनाओं की ओरयय
प्रदर्शी का जन सैलाब उमड़ता देखकर और 
बिक्री से उफनती तिजोरी से 
आयोजनकर्ता बेहद खुश थे। 
जब बेहद आनन्दित क्षण 
सम्भाला नहीं गया तो 
उन्होंने अपने मातहतों से कहा,-
"इस साल तुम्हारा बोनस दोगुना होगा।"


हुई मानवता शर्मसार 
रोज देखकर अखवार 
बस एक ही सार हर बार 
मनुज के मूल्यों का हो रहा हनन 
ह्रास उनका परिलक्षित 
होता हर बात में 
आसपास क्या हो रहा 
वह नहीं जानता 


मां
अगर ऐसा करूंगी तो फिर किस
स्वाभिमान से
अपने बच्चों को
बुरे भले की पहचान करवाऊंगी
किस मुंह से उन्हें
यातना और अन्याय के आगे
न झुकने का पाठ पढ़ाऊंगी


नवकिसलय अब तमस कोण से 
अँगड़ाई जब जब लेगा
अमराई के आलिंगन में 
नवजीवन तब खेलेगा।


लहरे छाप के रूप में ......
शंख ,सीपियों को छोड़ जाती हैं।
मछली पानी में अपनी गन्ध छोड़ देती है
पर एक इंसान ही ऐसा जीव ......है 


वक्त किसी के लिए 
ठहरता नही 
मगर तुम्हें उम्मीद है 
कि वो ठहरेगा 
सिर्फ और सिर्फ 
तुम्हारे लिए 
और इंतजार करेगा 
...
किस के रोके रूका है सवेरा 
रात भर का है मेहमान अंधेरा

अब बस
सादर