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Saturday, August 15, 2020

447..सिर्फ अब न वादे होंगे, जीत की आशा भी फलेगी

सादर शुभकामनाएँ
गूगल भी मना रहा है 
आज स्वतंत्रता दिवस

आज दिन भी बच्चे मायूस रहे
स्कूल बंद थे सारे
परेड ग्राऊँण्ड भी सूना ही था
सेव-बूंदी का पैकेट व लड्डू से
रहित हाथ सच में निराश ही थे
ये रोग आज बच्चों की 

स्वतंत्रता भी छीन ले गया

चलें रचनाओं की ओर ...

-नितीश तिवारी
लिख रहा हूँ आज मैं वो,
इंकलाब की आँधी है।
क्यों गलतफ़हमी में हो कि
आज़ादी दिलाने वाले गाँधी हैं।

तिरंगे की शान में ...कुसुम कोठारी
14/14 तिरंगे की शान में  सिर्फ अब न वादे होंगे  जीत की आशा फलेगी। ठान ले हर देश वासी रात तब गहरी ढलेगी।  लाखों की बलिवेदी पर  तिरंगे का इतिहास है। खोये कितने ही सपूत  जाकर मिला ये हास है। हर दिल में अब शान और मान की होली जलेगी।  मर्म तक कोई न भेदे   अब भी समय है हाथ में। हर दिशा में शत्रु फैले कर सामना मिल साथ में। आजादी की कीमत जब हर एक जन में पलेगी।  दुष्कर करदो जीना अब जो अमन को घायल करे। जीना वो जीना जानों हित देश के जीये मरे । ध्वज तिरंगा हाथ लेकर, इक हवा फिर से चलेगी।।  कुसुम कोठारी 'प्रज्ञा'
सिर्फ अब न वादे होंगे
जीत की आशा फलेगी।
ठान ले हर देश वासी
रात तब गहरी ढलेगी।



दिन चिंता का .... आशा सक्सेना

लंबित कई दिन का कष्ट
अब रोज का आराम
चिंता मुक्त हो गए हो
हुआ चंचल  मन शांत |
बेचैनी कहाँ खो गई
जान नहीं पाई
प्रभू से की थी  प्रार्थना
ऐसे दिन किसी को न दिखाए |

पिल्ला ..हर्षवर्धन जोग

तड़के को पार्क में सैर करने जाता हूँ जी.पार्क में एक भली सी लड़की आती है पिल्ला लेकर.वो जो वोडाफोन का पिल्ला टीवी पर आता है उसको लेकर. अब उस से बात कैसे हो? मुझे उस कुत्ते से डर लगे है जाने कैसी शकल है सुसरे की. गाय भैंस तो कैसी भी हो संभाल लूँगा पर यो पिल्ला खतरनाक लगे है.


अथ श्री बरगद कथा
डॉ. सुशील जोशी
पता
नहीं चलता है
मगर
कुछ लोग
समय के साथ बरगद हो जाते हैं

ऐसा नहीं है
कि
लोग बरगद होना नहीं चाहते हैं

लोग जन्म से बरगद ही होते हैं

.....
आज बस
कल शायद कोई और
सादर