सादर अभिवादन
आज हम सखी श्वेता सो कह चुके थे
आज आप प्रस्तुति दे दीजिए
अभी हमारे इन्टर्नेट ले करवट बदली
सो आ गए हम...
देखिए आज की रचनाएँ
आज हम सखी श्वेता सो कह चुके थे
आज आप प्रस्तुति दे दीजिए
अभी हमारे इन्टर्नेट ले करवट बदली
सो आ गए हम...
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अब तक "मन के डेटिंग" पर
मिली हो जब भी तुम तो ....
कृत्रिम रासायनिक
सौंदर्य- प्रसाधनों और सुगंधों की
परतों में लिपटी
किसी सौंदर्य-प्रसाधन की
विज्ञापन- बाला की तरह
चकपक करती परिधानों में
शायद गाँठ बांधी थी नदी
एक के अनुपस्थिति में
दूसरे की
दूसरे की
पहले की अनुपस्थिति में
“आज बातचीत नहीं, एक कहानी सुनो ;
एक गाँव में दो मूरख रहते थे—हक्कन और फक्कन।
दोनों के मकान अगल-बगल थे। बीच की दीवारें कुछ ऐसी
कि मौका-बेमौका जब चाहतीं, ऊँची-नीची और सपाट होती रहतीं।
हक्कन की माँ ने एक दिन उसे बताया—‘बेटा, फक्कन ने भी
मेरे ही पेट से जनम लिया है। वह भाई है तेरा।.
कि
सुख का
अलग से कहीं कोई अस्तित्व नहीं
दुःख में साथ मुस्कुराना ही सुख है!
इश्क़ में यूँ उतर जाना
बेवजह तो नहीं है,
इस दर्द से गुज़र जाना
बेवजह तो नहीं है...
अब बस..
आज्ञा दें
यशोदा